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नवजात शिशु बहुत ही कोमल होते है, उनकी देखभाल में खास ख्याल रखना चाहिए, जो महिलाएं पहली बार मां बनती है उनके लिए तो ये सफर एकदम नया होता है, कभी कभी उन्हे समझ ही नही आता की उन्हे क्या करना चाहिए, बच्चे को कैसे गोद में ले, उन्हे देखभाल कैसे करे, और भी कई सवाल घूमते रहते है। तो आज में आप सबके लिए जो जानकारी लेकर आई हूं की आप अपने परिवार के नन्हे सदस्य की देखभाल कैसे कर सकते है। बच्चे के आ जाने के बाद हमारी दिनचर्या बच्चे के हिसाब से ही बनानी होती है। 

इन 10 तरीको से करे बच्चों की देखभाल

सफाई का रखें खास खयाल

बच्चो के घर में स्वच्छता बहुत जरूरी है। बच्चे को गोद में लेने से पहले हाथो को अच्छी तरह से धो ले, हमेशा साफ हाथो से ही बच्चे को उठाए। अगर परिवार का कोई अन्य सदस्य भी बच्चे को गोद में लेता है तो उन्हें भी पहले हाथ धोने के लिए कहे, फिर ही उन्हे या फिर किसी को भी बच्चे को लेने दे।

कपड़े कैसे पहनाएँ

बच्चो को हमेशा पूरी तरह से कवर करके रखने वाले कपड़े पहनाए, उन्हे हाथों में मिटंस भी पहनाए। मौसम के अनुसार ही बच्चो को कपड़े पहनाए, गर्मियों में बच्चे को सूती लेकिन नरम और मुलायम फैब्रिक के कपड़े ही पहनाए। कपड़े ज्यादा तंग और कसे हुए नहीं पहनाने चाहिए, गर्मियों में थोड़े ढीले कपड़े ही बच्चो को पहनाए।

शिशु को कैसे नहलाएँ

वैसे तो नवजात शिशु को रोज नहला सकते हैं, लेकिन अगर आप बच्चे को रोज नही नहला रही है तो किसी साफ सूती कपड़े से उसे अच्छी तरह से पोंछ दे और उसके कपड़े बदल दे। बच्चे को नहलाने के लिए हल्के गरम (गुनगुने) पानी का इस्तेमाल करे तो अच्छा रहता है, इस से बच्चे को सर्दी लगने का खतरा नही होता है। बच्चे को नहलाने के पानी के तापमान को अपनी कोहनी को पानी में डालकर चेक करें और उसके बाद ही उस पानी से बच्चे को नहलाए।

शिशु को कैसे कपड़े पहनाने चाहिए ?

बच्चे को कभी भी मोटे कपड़े नही पहनाने चाहिए उसे हमेशा हल्के हल्के, लेयरिंग में कपड़े पहनने चाहिए, इस से उसे ज्यादा गरमाई मिलती है। मोटे कपड़े पहनने से बच्चे का दम घुटने का खतरा रहता है।

नवजात शिशु का आहार क्या होना चाहिए?

6 महीने तक के शिशु को सिर्फ स्तनपान ही कराना चाहिए, वैसे तो जितना अधिक समय तक हो सके मां अपने बच्चे को स्तनपान कराए तो ये बच्चे के विकास में सहायक होता है, लेकिन आज की जीवनशैली इतनी व्यवस्थित है की मां ज्यादा समय तक स्तनपान नहीं करा पाती हैं। डिलीवरी के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान जरूर कराए, इस समय आपके स्तन से जो पीला गाड़ा दूध निकलता है उसमे सभी पोषक तत्व मौजूद होते है, जो शिशु के विकास के लिए अति आवश्यक है। 6 महीने के होने बाद आप बच्चे को फल, या फिर जूस, दाल, दलिया,  इत्यादि देना शुरू कर सकते हैं।

रोज मालिश है जरूरी

मालिश भी बच्चे के विकास में सहायक होती है, मालिश करने से बच्चे के शारीरिक विकास में मदद मिलती है और मासपेशियां मजबूत होती है। मालिश करते समय आप बच्चे के साथ बाते करे, इस से आप दोनो में अच्छी बॉन्डिंग भी बनती है, और बच्चा मालिश करवाने में परेशान भी नहीं करता है, वो भी इसे एंजॉय करता है।

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Photo by Khoa Pham on Unsplash

बहुत से बच्चे तो मालिश करवाने के समय में बहुत खुश होते है, हंसते हैं, जिससे उनका विकास भी सही प्रकार से होता है। मालिश करने के लिए आप जैतून का तेल या फिर बादाम का और सरसो का तेल या फिर बेबी ऑयल भी इस्तेमाल कर सकती है। मालिश करने से पहले तेल को थोड़ा गरम ( गुनगुना ) करके ही इस्तेमाल करे।

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ऐसा बिल्कुल न करें

बच्चो को कभी भी जोर जोर से नहीं हिलाना चाहिए, और ना ही कभी उन्हे गोद में लेकर उछलना चाहिए, इस से उनकी मासपेशिया खिच सकती है। इसलिए इस बात का खास ख्याल रखे की परिवार में अन्य सदस्य भी ऐसा ना करे।

गर्भनाल की देखभाल कैसे करें ?

नवजात शिशुओं के गर्भनाल की भी देखभाल रखनी बहुत जरूरी है, वरना उसमे इन्फेक्शन हो सकता है, गर्भनाल 10 से 12 दिनों में गिर जाती है या फिर लगभग 2 हफ्ते तक। लेकिन तब तक आप बच्चे को स्पोंज bath ही कराए। स्पोंज बाथ कराने के लिए आप बच्चे को गुनगुने पानी में कपड़ा गीला करके उस से बच्चे को पोंछ सकती है।

इसके बाद उसे सूखे नरम तोलिए से अच्छी तरह से पोंछ दे और कपड़े पहना दे। ध्यान रखें की गर्भनाल को सूखा ही रखना है जिसने उसके गिरने में आसानी होगी, अगर गर्भनाल में आपको किसी तरह का पस या किसी भी तरह का इन्फेक्शन दिख रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दूध पिलाने के बाद डकार / बर्पिंग

बच्चे को दूध पिलाने के बाद डकार यानी की बर्पिंग जरूर करवाएं, इस से बच्चे ने दूध पीते समय जो भी हवा अंदर ली होगी वो बाहर निकल जायेगी और बच्चा दूध को आसानी से पचा पाएगा। अगर आप दूध पिलाने के बाद शिशु को डकार या बर्पिग नही करवाती है तो कई बार बच्चे दूध भी बाहर निकाल देते है। अगर कभी बच्चे दूध निकाल भी दे तो उसी समय उन्हे साफ करके उनके कपड़े बदल देने चाहिए। बच्चो को हमेशा नरम कपड़े ही पहनाए। जिस से उनकी कोमल त्वचा को नुकसान न पहुंचे।

शिशु के सोने का पैटर्न

शुरू के कुछ हफ्ते तक बच्चे पूरे दिन में 16 से 18 घंटे तक सोते है, और एक बार में 3 से 4 घंटे के लिए लगातार सोते है, तो ऐसे में उन्हे जगा कर स्तनपान कराए। कुछ बच्चे दिन में ज्यादा सोते है और रात को ऐक्टिव रहते है, तो ऐसे में आपको चाहिए के बच्चे के सोने के पैटर्न को सेट करने की कोशिश करे ।

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Photo by Nyana Stoica on Unsplash

इसके लिए आपको कुछ समय तक लगातार कोशिश करनी होगी अन्यथा आपका बच्चा दिन में सोएगा और रात में जागेगा। इसके लिए आपको कमरे की रोशनी को धीमा करना होगा, अपनी आवाज को भी कम करना होगा, बच्चे को ऐसा अहसास कराना होगा की रात सोने के लिए होती है। 

FAQ

नवजात कमजोर हो तो क्या करना चाहिए?

अगर आपका नवजात शिशु कमजोर है तो उसके लिए ‘कंगारू मदर केयर'(केएमसी) काफ़ी असरदार साबित हो सकता है । ‘कंगारू मदर केयर’ के तहत मां या घर का कोई भी सदस्य बच्चे  को अपनी छाती से चिपकाकर नवजात शिशु को शरीर की गर्मी प्रदान करते हैं. इससे नवजात शिशु को हाइपोथर्मिया से उबरने में सहायता मिलती है ।

नवजात शिशु का वजन कितना होना चाहिए?

एक स्वस्थ नवजात शिशु का वजन प्राय: 2.5 से 4.3 किलोग्राम तक होता है ।

नवजात शिशु 24 घंटे में कितनी देर सोता है?

नवजात शिशु दिनभर में लगभग 19 घंटे तक सो सकता है। हालांकि, नेशनल स्‍लीप फाउंडेशन के अनुसार समान्यतः नवजात शिशु 14 से 17 घंटे की नींद लेता है। इस दौरान बच्‍चा दो, तीन या चार घंटे के बीच में दूध पीने के लिए जागता है और दूध पीकर दोबारा सो जाता है।

एक बच्चे का टीकाकरण कब पूर्ण माना जाता है ?

जब एक बच्चे को जन्म के पहले वर्ष में बी.सी. जी. का एक टीका, डी.पी.टी. के तीन टीके, हेपेटाइटिस ‘बी’ के तीन टीके, पोलियो की तीन खुराक और खसरे का एक टीका लग गया हो, तब बच्चे का टीकाकरण पूर्ण माना जाता है।

निष्कर्ष

कुछ समय तक लगातार समय पर बच्चे का रूटीन फॉलो करने से उसके हर काम का एक समय लगभग फिक्स हो जाता है, जिस से आपको कुछ समय बाद काफी फायदा होता है, हालांकि बच्चे को एक रूटीन में सेट करने के लिए समय और संयम दोनो की आवश्यकता होती है। जब आप बच्चे के हर काम का एक समय फिक्स रखेंगी जैसे उसके खाने का, नहलाने का, या फिर उसे सुलाने का, बच्चे का शरीर कुछ समय में अपने आप ही उस रूटीन को फॉलो करने लगता है।

बस आपको स्टिक टू रूटीन रहना है, ऐसा ना करे की घर में कोई मेहमान आया और वो बच्चे के सोने का समय है, तो उसे उस समय जरूर सुलाए, किसी भी कारण से बदलाव न करे, अन्यथा बच्चे इस बदलाव को आदत न होने से वो कई बार चिड़चिड़े भी हो जाते है, बहुत रोने लगते है और हम समझ ही नही पाते की ऐसा क्यू हो रहा है।


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